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भटकती हुई भेड़ो का यह द्रष्टान्त सीखो ?

 भटकती हुई भेड़ो का यह द्रष्टान्त सीखो 





प्रभु यीशु मसीह अक्सर लोगों को परमेश्वर के राज्य के बारे में सिखाने के लिए साधारण कहानियों दृष्टांतों का उपयोग करते थे।
एक बार उन्होंने फरीसियों और शास्त्रीय पंडितों को देखकर यह दृष्टांत सुनाया


भटकती हुई भेड़ो का यह द्रष्टान्त सीखो ? 



तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे?
और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है।







और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे करके कहता है मेरे साथ आनन्द करो क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।
मैं तुम से कहता हूं कि इसी रीति से एक मन फिरानेवाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा जितना कि निन्नानवे ऐसे धमिर्यों के विषय नहीं होता जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं





या कौन ऐसी स्त्री होगी जिस के पास दस सिक्के हों और उन में से एक खो जाए तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे ?





और जब मिल जाता है तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी करके कहती है कि मेरे साथ आनन्द करो क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्का मिल गया है।


भटकती हुई भेड़ो का यह द्रष्टान्त सीखो ? bhatakatee huee bhedo ka yah drashtaant seekho ? 




मैं तुम से कहता हूं कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है
इस दृष्टांत में भेड़पालक चरवाहा स्वयं परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह है और भटकती हुई भेड़ उन मनुष्यों को दर्शाती है जो परमेश्वर के मार्ग से भटक गए हैं।

भटकती हुई भेड़ का दृष्टांत 



यह कहानी प्रभु यीशु की करुणा और प्रेम को दर्शाती है। वह निन्यानवे सुरक्षित लोगों को छोड़कर भी उस एक खोए हुए व्यक्ति को खोजने के लिए हर प्रयास करते हैं। यह दिखाता है कि परमेश्वर की नज़र में हर एक आत्मा अमूल्य है और जब हम परमेश्‍वर के सामने अपने पापो स्वीकार करते है है तो स्वर्ग में बड़ा आनंद मनाया जाता है आमीन जय मसीह की 



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